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दिवाली पर क्या करे

स्कन्दपुराण, पद्मपुराण तथा भविष्यपुराण में दीपावली मनाने के संदर्भ में विभिन्न मान्यताएँ उपलब्ध हैं। भगवान श्रीराम के विजयोपलक्ष्य में अयोध्या में उनके स्वागतार्थ दीपमाला प्रज्वलित की गयी। तब से दीपावली मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार आज ही के दिन समुद्र-मंथन से भगवती लक्ष्मीजी प्रकट हुई थीं। महालक्ष्मी के प्राकट्य दिवस को प्रसन्नता व उल्लास के साथ दीपोत्सव के रूप में मनाया जाता है। तिल से बना सप्तधान्य उबटन लगाकर स्नान करें। इससे पुण्यलाभ तथा स्वास्थ्य दोनों की प्राप्ति होती है। जल में थोड़ा उबटन और सूरजमुखी तेल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। उसके बाद गाय की पूजा करके तेलयुक्त उबटन से गाय को तिलक करें। सायंकाल अपने घर, ऑफिस, दुकान आदि की चौखट पर हल्दी का स्वस्तिक बनायें। अक्षत, पुष्पादि से स्वस्तिक की पूजा करके उस पर २ घी व २ तेल के दीपक चारों दिशाओं की ओर लौ करके जलायें।जगमग हो सारा जहाँ लक्ष्मी प्राप्ति के लिए निम्न विधि से पूजन करें.. घर को स्वच्छ कर, स्वयं भी पवित्र होकर गणेशजी के दायें भाग में माता महालक्ष्मी तथा बायें भाग में माँ सरस्वती को स्थापित करें । सायंकाल दीपक जलाकर, पीले...

नरक चतुर्दशी पर क्या करें

नरक चतुर्दशी नरक चतुर्दशी को काली चौदस भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर संसार को भयमुक्त किया था। एक अन्य कथा के अनुसार वामन अवतार में भगवान ने संपूर्ण पृथ्वी नाप ली। बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर वामन भगवान ने उसे वर माँगने को कहा। उस समय बलि ने भगवान से प्रार्थना की कि 'कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, नरक चतुर्दशी और दीपावली इन तीन दिनों में मेरे राज्य का जो भी व्यक्ति यमराज के उद्देश्य से दीपदान करेगा, उसे यम यातना न हो तथा इन दिनों में दीपावली मनानेवाले का घर लक्ष्मीजी कभी न छोड़ें ।' भगवान ने कहा : "एवमस्तु । जो मनुष्य इन दिनों में दीपोत्सव करेगा, उसे छोड़कर मेरी प्रिय लक्ष्मी कहीं नहीं जायेगी।" क्या करें नरक चतुर्दशी के दिन ? इस दिन तेल में लक्ष्मीजी और जल में गंगाजी निवासकरती हैं। अतः सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश कर स्नान करने से मनुष्य को यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता। स्नान से पहले हल में लगी हुई मिट्टी(चिचिड़ा), भटकटैया, तुम्बी (गोल लौकी), गाय के खुर की मिट्टी या तुलसी की मिट्टी में से जो भी मिलें उसे निम्न म...

धनतेरस पर क्या करे

क्या करें धनतेरस के दिन ? सुबह उठकर स्नान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान धन्वतरि की पूजा कर स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा में धन्वतरि की भावना कर इस दिन भगवान सूर्य को निरोगता की कामना कर लाल फूल डालकर अर्घ्य दें । सायंकाल घर के बाहर मुख्य दरवाजे पर एक पात्र में चावल, गेहूँ व गुड़ रखें । उसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर- 'मैं यमराज के निमित्त दीपदान कर रहा हूँ, भगवान यमराज देवी श्यामासहित मुझ पर प्रसन्न हों।' ऐसा बोलकर उस अनाज के ऊपर यमराज के निमित्त दीपक जलायें और पद्मपुराण के निम्नोक्त मंत्र का उच्चारण करते हुए गंध-पुष्पादि से पूजन करें - मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीयतामिति ॥ लक्ष्मी प्राप्ति हेतु लक्ष्मीजी की पूजा करके 'ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे । अष्टलक्ष्मी च धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।' - इस मंत्र का जप करें।