नरक चतुर्दशी पर क्या करें
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी को काली चौदस भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर संसार को भयमुक्त किया था।
एक अन्य कथा के अनुसार वामन अवतार में भगवान ने संपूर्ण पृथ्वी नाप ली। बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर वामन भगवान ने उसे वर माँगने को कहा। उस समय बलि ने भगवान से प्रार्थना की कि 'कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, नरक चतुर्दशी और दीपावली इन तीन दिनों में मेरे राज्य का जो भी व्यक्ति यमराज के उद्देश्य से दीपदान करेगा, उसे यम यातना न हो तथा इन दिनों में दीपावली मनानेवाले का घर लक्ष्मीजी कभी न छोड़ें ।' भगवान ने कहा : "एवमस्तु । जो मनुष्य इन दिनों में दीपोत्सव करेगा, उसे छोड़कर मेरी प्रिय लक्ष्मी कहीं नहीं जायेगी।"
क्या करें नरक चतुर्दशी के दिन ?
इस दिन तेल में लक्ष्मीजी और जल में गंगाजी निवासकरती हैं। अतः सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश कर स्नान करने से मनुष्य को यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता। स्नान से पहले हल में लगी हुई मिट्टी(चिचिड़ा), भटकटैया, तुम्बी (गोल लौकी), गाय के खुर की मिट्टी या तुलसी की मिट्टी में से जो भी मिलें उसे निम्न मंत्र पढ़कर सिर के चारों ओर तीन बार यह भावना करते हुए घुमायें - 'मैं तुम्हें बार-बार मस्तक पर घुमा रहा हूँ, मेरे पाप, ताप एवं दुःख-दारिद्रय का नाश हो।' उसके बाद उसे मस्तक से स्पर्श कराके घर के बाहर बायीं ओर फेंक दें।
सितालोष्ठ समायुक्तं सकण्टकदलान्वितम् । कर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः ।
स्नान के पश्चात् शुद्ध वस्त्र पहनकर, तिलक लगाकर, एक पात्र में तिलयुक्त जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त नीचे दिये गये प्रत्येक मंत्र का तीन बार उच्चारण करते हुए तीन-तीन बार अंजलि से जल अर्पण करें और चार बत्तियोंवाला (चार मुखी) दीपक जलायें । यह पुण्यदायी यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
ॐ यमाय नमः, ॐ धर्मराजाय नमः, ॐ मृत्यवे नमः,
ॐ अंतकाय नमः, ॐ वैवस्वताय नमः, ॐ कालाय नमः,
ॐ सर्वभूक्षाय नमः, ॐ औदुम्बराय नमः, ॐ दध्नाय नमः,
ॐ नीलाय नमः, ॐ परमेष्टिने नमः, ॐ वृकोदराय नमः,
ॐ चित्राय नमः, ॐ चित्रगुप्ताय नमः ।
इस दिन मंदिर, रसोईघर, स्नानघर, तुलसी एवं देववृक्षों (बरगद, पीपल, आँवला, आम आदि) के नीचे, नदियों के किनारे, बगीचे, गौशाला आदि प्रत्येक स्थान पर दीपक जलायें।
लक्ष्मीजी की प्रसन्नता के लिए 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा' - इस मंत्र का जप करें । रात्रि में सरसों के तेल अथवा घी के दीये से काजल बनाकर आँखों में लगायें। इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है तथा बुरी नजर से रक्षा होती है
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